लव जिहाद और वैश्विक इस्लाम:डॉ. रोहित मौर्य,लखनऊ!
"वैश्विक इस्लाम" जो 'सत्ता नहीं तो इस्लाम नहीं' की विचारधारा पर चलते हुए किसी भी अन्य धर्म या संप्रदाय के साथ सामंजस्य बैठाने और उसके साथ शासन में साझेदारी करने का विरोध करती है, यह " वैश्विक इस्लाम" साम्राज्यवादी विचारों के आधार पर अपना विस्तार चाहती है, जिसका जीवंत उदाहरण देश ने विभाजन के समय देखा है, कभी भारत के प्रांत रहे सिंध, पंजाब, बलूचिस्तान, गिलगित, बालटिस्तान इस्लामिक विचारधारा द्वारा हथियाया गया भारतीय हिस्सा है जिसका अधिकतर भूभाग पाकिस्तान में है । पाकिस्तान के बनते ही वहां पर मौजूद अन्य समुदाय खासकर हिंदुओं की स्थिति दयनीय हो गई l
इस्लाम की विजय और काफिरों की सेना का नाश, वहाबी व देवबंदी आंदोलन की कट्टरता इस्लामिक पृष्ठभूमि से उपजी हुई एक कुंठित सोच जो मानवता के लिए हमेशा से खतरा रही है । इसके घातक एजेंडों की विश्व भर में पोल खुलते ही "वैश्विक इस्लाम" विचारधाराक इस्लामिक कट्टरपंथियों ने अपनी रणनीति में सुधार करते हुए साफ्ट टारगेट "लव जिहाद" के माध्यम से योजनाबद्ध तरीकों द्वारा हिंदुओं की बहन बेटियों को प्रेम के जंजाल में फंसाकर शोषण व हत्या करने की खुली चुनौती दे रखी है, इस विषय पर सामाजिक चिंतन होना बहुत आवश्यक हो गया है । भारतीय फिल्मकारों द्वारा निर्मित कश्मीर फाइल एवं द केरल टाइम्स जैसी सिनेमा द्वारा इनके हिडन एजेंडे को समझा और देखा जा सकता है तथा इनमें मौजूद भविष्य के लिए दूरदर्शिता और चेतावनी के प्रति सचेत भी होना होगा ।
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