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Friday 04 Apr 2025 5:05 AM

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ऊर्जा का कभी विनाश नहीं होता--प्रोफेसर एस.सी.तिवारी!



समस्त ब्रह्माण्ड के निर्माण का मूलभूत तत्व ऊर्जा है। ऊर्जा अक्षय एवम अनंत है ।अतएव सनातन संस्कृति का  पुनर्जन्म सिद्धांत वैज्ञानिक व दार्शनिक दृष्टिकोण से पूर्णतः सत्य है । यह वक्तव्य संस्कृत विभाग नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय प्रयागराज उ.प्र.(भारत)  तथा सूरीनाम हिन्दी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'सनातन संस्कृति में पुनर्जन्म सिद्धांत विषयक एक दिवसीय अन्ताराष्ट्रिय वेबिनार में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय प्रयागराज के प्रतिकुलपति प्रोफेसर (डॉ.) एस. सी. तिवारी जी ने बताया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ नरेन्द्र नाथ व्यास जी ने उल्कामुख,तुंगध्वज राजाओं के पौराणिक आख्यानों के माध्यम से भारतीय संस्कृति में निहित पुनर्जन्म सिद्धांत पर विस्तृत प्रकाश डाला, डॉ त्र्यंबक नाथ जी ने पुनर्जन्म सिद्धांत को सनातन संस्कृति, सनातन धर्म, कर्म और आध्यात्मिक विकास का आधार बताया।आचार्य पंकज जी ने पुनर्जन्म सिद्धांत की दार्शनिकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। सूरीनाम हिन्दी परिषद की सदस्या श्रीमती मन्द्राचल घिसई दुवे ने सनातन संस्कृति के पुनर्जन्म सिद्धांत की भूरि भूरि प्रसंसा की । सूरीनाम के लब्धप्रतिष्ठ ज्योतिष कर्मकाण्ड एवं वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ तथा नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय प्रयागराज के पुरा छात्र आचार्य चन्द्रिका प्रसाद जेठू ने अपने पुराने अनुभवों को साझा किया तथा आचार्य व्रजेन्द्र मिश्र ने ज्योतिष शास्त्र के आधार पर पुनर्जन्म सिद्धांत पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय प्रयागराज के ज्योतिष कर्मकाण्ड वास्तुशास्त्र एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ देव नारायण पाठक ने किया तथा बताया कि पुनर्जन्म की अवधारणा के विना कर्म,मोक्ष,आत्मा तथा ईश्वर अर्थहीन है। आधुनिक समाज धर्म एवं कर्म से विमुख होता चला जा रहा है। ' मातृ देवो भव,पितृ देवो भव, अतिथि देवो भव ' जैसे सिद्धांत केवल पुस्तकों का सिद्धांत मात्र बनकर रह गए हैं। सम्पूर्ण संसार में जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद के साथ- साथ धार्मिक कटुता तथा कट्टरता व्याप्त है।मानव भौतिकतावाद के अन्धकार में फंसकर अपने जीवन के रहस्यमय तत्त्व से अनभिज्ञ होता चला जा रहा है। सूरीनाम हिन्दी परिषद तथा संस्कृत विभाग, नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय प्रयागराज उ.प्र.(भारत) के इस शैक्षणिक एम्.ओ.यू.से सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार तथा उसमें निहित वैज्ञानिक तत्त्व को समझने की दिशा को गति प्राप्त होगी और समाज का एक बड़ा वर्ग लाभान्वित होगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ आदिनाथ ने किया तथा सूरीनाम हिन्दी परिषद के अध्यक्ष श्री एस.परमसुख ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर सूरीनाम हिन्दी परिषद के सचिव किशन फिरतू, हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ ममता मिश्र, डॉ आलोक कुमार विश्वकर्मा सहित दोनों देशों के सैंकड़ों छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे।


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