इंदिरा मैराथन जीतने वाली सुधा सिंह से प्रयाग दर्पण की खास बातचीत, बोलीं- " मैराथन जीतने का सपना हुआ साकार" बचपन में पढ़ाई से ज्यादा खेलना पसंद था !
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- उत्तर प्रदेश
- Updated: 20 November, 2022 13:08
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प्रयागराज में आयोजित इंदिरा मैराथन में रायबरेली की सुधा सिंह चैंपियन बनीं. जिद और जुनून के चलते उन्होंने 42.19 किलोमीटर की दौड़ 2 घंटे 51 मिनट और 40 सेकेंड में पूरी की और अपने प्रतिद्वंदियों को मात दी. सुधा सिंह कहती हैं, "इंदिरा मैराथन जीतना मेरा सपना था। मैं साल 2006 में दौड़ने आई थी। लेकिन उम्र की वजह से इजाजत नहीं मिली।" अर्जुन अवॉर्ड और पद्मश्री से सम्मानित ओलंपियन सुधा सिंह को पीएम मोदी ने साल 2021 में सम्मानित किया था.
आइए जानते हैं सुधा सिंह के बारे में
सुधा सिंह रायबरेली के भीमी गांव की रहने वाली हैं. अर्जुन अवॉर्ड के साथ-साथ उन्होंने पद्मश्री भी अपने नाम किया है। पिता हरि नारायण सिंह रायबरेली की आईटीआई फैक्ट्री में क्लर्क हैं। सुधा कहती हैं, "बचपन में मुझे पढ़ाई से ज्यादा खेलना अच्छा लगता था। कोचिंग शुरू होने से पहले मैं रायबरेली के दयानंद गर्ल्स इंटर कॉलेज में दौड़ने जाया करती थी। मैं हर दिन 20 किलोमीटर दौड़ती थी। उम्र में उन्हें पहला अवॉर्ड मिला था।" 14. खेलों का मेडल मिलने के बाद मुझे रियो ओलिंपिक में भी खेलने का मौका मिला। इसके लिए पीएम मोदी ने मुझे सम्मानित भी किया।'
2021 में निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुधा को पद्म श्री पुरस्कार दिया।
वर्ष 2003: शिकागो में जूनियर राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में कांस्य पदक।
वर्ष 2004: कल्लम से जूनियर राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक।
वर्ष 2005: चीन में जूनियर एशियन क्रॉस कंट्री प्रतियोगिता में चयनित।
वर्ष 2007: राष्ट्रीय खेलों में प्रथम स्थान।
वर्ष 2008: सीनियर ओपन नेशनल में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
वर्ष 2009: एशियन ट्रैक एंड फील्ड में दूसरा स्थान।
वर्ष 2012: अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित। साल 2015: रियो ओलिंपिक के लिए चयनित।
साल 2016: IAAF डायमंड लीग मीट में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रचा।
साल 2021: पद्मश्री से नवाजी गई ।
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