Amrit Bharat Logo

Friday 04 Apr 2025 5:08 AM

Breaking News:

गुरु पूर्णिमा पर विशेष :ड्रैगन एकेडमी ऑफ मार्शल आर्ट्स इंदिरा नगर, लखनऊ!





कुछ लोग कहते हैं कि 

 गुरु-शिष्य की परंपरा के अनुसार पता चलता है कि गुरु वह होता है जो आपकी नींद तोड़ दे और आपको मोक्ष के मार्ग पर किसी भी तरह धकेल दे।

 

जो भी जिस भी प्रकार की शिक्षा दे वह सभी गुरु ही होते हैं। 

गुरु द्रोण ने धनुष विद्या की शिक्षा दी, तो क्या वे गुरु नहीं थे? 

क्या जो सिर्फ मोक्ष का मार्ग ही दिखाए वहीं गुरु होते हैं, जो डॉट नेट‍, डॉक्टरी या इंजीनियरिंग सिखाए वे गुरु नहीं होते?

 

गुरु की खोज बहुत मुश्किल होती है। गुरु भी शिष्य को खोजता रहता है। बहुत मौके ऐसे होते हैं कि गुरु हमारे आसपास ही होता है, लेकिन हम उसे ढूंढ़ते हैं किसी मठ में, आश्रम में, जंगल में या किसी भव्य प्रेस कांफ्रेंस में।

 

बहुत साधारण से लोग हमें गुरु नहीं लगते, क्योंकि वे तामझाम के साथ हमारे सामने प्रस्तुत नहीं होते हैं। वे ग्लैमर की दुनिया में नहीं है और वे तुम्हारे जैसे तर्कशील भी नहीं है। वे बहस करना तो कतई नहीं जानते।

 

तुम जब तक उसे तर्क या स्वार्थ की कसौटी पर कस नहीं लेते तब तक उसे गुरु बनाते भी नहीं। लेकिन अधिकांश ऐसे हैं जो अंधे भक्त हैं, तो स्वाभाविक ही है कि उनके गुरु भी अंधे ही होंगे। 

मान जा सकता है कि वर्तमान में तो अंधे गुरुओं की जमात है, जो ज्यादा से ज्यादा भक्त बटोरने में लगी है। जिससे वे धन उपार्जन कर सकें

 

जैन धर्म में कहा गया है कि साधु होना सिद्धों या अरिहंतों की पहली सीढ़ी है। अभी आप साधु ही नहीं हैं और गुरु बनकर दीक्षा देने लगे तो फिर सोचो ये कैसे गुरु। 


कबीर के एक दोहे की पंक्ति है- 'गुरु बिन ज्ञान ना होए मोरे बाबा।' 


हमारे जीवन में भी ऐसे बहुत से मौके आते हैं जबकि हम भगवानश्री को देखने और सुनने से चूक जाते हैं, क्योंकि हम किसी अन्य तथाकथित के चक्कर में लगे रहते हैं। ऐसे आदरणीय और सच्चे गुरुओं को हम हम खोज सकें तभी ज्ञान प्राप्त हो सकेगा

गुरु पूर्णिमा पर शत: शत: नमन...।

Comments

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *