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Friday 04 Apr 2025 5:18 AM

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त्रिदिवसीय ज्योतिष कार्यशाला में द्वादश राशियों तथा नव सम्वत्सर पर विस्तृत चर्चा हुई


नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय प्रयागराज एवं ग्लोबल संस्कृत फोरम, दिल्ली प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में त्रिदिवसीय ज्योतिष कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ कार्यशाला के प्रथम दिवस ख्यातिलब्ध ज्योतिर्विद पं.ब्रजेन्द्र मिश्र ने आंग्ल नव वर्ष में द्वादश राशियों का फलादेश के प्रसंग में मेषादि द्वादश राशियों के  फलादेश पर चर्चा किया तथा शनि की शाढे साती तथा शनि की ढैय्या जिन - जिन राशियों पर है,उनके उपायों पर विस्तृत प्रकाश डाला।नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय प्रयागराज,उ.प्र. के ज्योतिष, कर्मकाण्ड, वास्तुशास्त्र एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. देव नारायण पाठक ने बताया कि नव सम्वत्सर के राजा बुध तथा मन्त्री शुक्र हैं। वर्षारम्भ में 'नल' नामक सम्वत्सर रहेगा तथा संकल्पादि में वर्ष पर्यन्त इसी सम्वत्सर का विनियोग करना चाहिए। २४ अप्रैल २०२३ को 'पिंगल' नामक सम्वत्सर का प्रवेश होगा। डॉ.पाठक ने बताया कि राजा बुध और मन्त्री शुक्र में मित्रता होने के कारण सत्ता पक्ष में सरलता पूर्वक कार्य होगा। यदि जगल्लग्न पर विचार किया जाय तो लग्नेश बुध का अष्टम भाव में राहु के साथ होने के कारण विश्व में शान्ति का अभाव रहेगा, द्वितीय भाव पर राहु की दृष्टि होने से कुछ देशों की आन्तरिक स्थिति खराब हो सकती है। तृतीयेश अपने से अष्टम होने के कारण पड़ोसी देशों से सम्बन्ध ठीक नहीं रहेंगे तथा विश्व में रक्तपात तथा नरसंहार जैसा परिणाम दिखाई देगा। विश्व व्यापार में आकस्मिक मन्दी की स्थिति रहने की सम्भावना है । वर्ष लग्न पर यदि विचार किया जाय तो लग्नेश अष्टम भाव में होने के कारण तथा वर्ष का राजा बुध,शनि से दृष्ट होने के कारण आतंकवादी ताकतों का विश्व में प्रसार, वाहन दुर्घटना,भौमान्तरिक्ष उत्पात तथा विस्फोट से जन-धन की हानि की सम्भावना बनी रहेगी और  विरोधी दलों का वर्चस्व बढ़ेगा। यदि भारत देश की बात की जाय तो शनि में मंगल के नवपंचमयोग से भारत की राजनीति में विशेष कानून व्यवस्था लागू होगी और भारत सर्वतोमुखी विकास की ओर अग्रसर होगा। कार्यक्रम का संचालन  ग्लोबल संस्कृत फोरम के सचिव डॉ.सर्वेश मिश्र ने किया तथा डॉ.राजेश जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस कार्यशाला में ज्योतिष, कर्मकाण्ड, वास्तुशास्त्र एवं संस्कृत विभाग के शताधिक छात्र-छात्राओं के अतिरिक्त आचार्य श्री अजय शुक्ल, आचार्य हरि ओम शास्त्री, आचार्य श्री ओम शास्त्री, आचार्य श्री प्रमोद कृष्णम, डॉ.प्रभात कुमार, डॉ.वी.के.मौर्य,काजल पाण्डेय, तमन्ना यादव, तथा ग्लोबल संस्कृत फोरम दिल्ली प्रान्त के अनेक गणमान्य विद्वान् उपस्थित रहे।

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