खुदकुशी करने वाली महिला के पति व सास को 7 साल की कठोर कैद

एक स्थानीय अदालत ने सेक्टर 46-डी निवासी एक व्यक्ति और उसकी मां को अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, जिसने 8 मार्च, 2019 को खुदकुशी कर ली थी.
पुलिस के अनुसार, 25 वर्षीय पीड़िता फांसी पर लटकी मिली थी और एक सुसाइड नोट भी मिला था. उसकी मां ने पुलिस को बताया था कि 23 फरवरी, 2018 को उसकी शादी होने के बाद से ही उसके ससुराल वाले और पति उसे दहेज के लिए प्रताड़ित कर रहे थे. वे कथित तौर पर उसे दहेज के रूप में कार लेने के लिए मजबूर कर रहे थे.
मां की शिकायत पर पुलिस ने पीड़िता के पति और ससुर को गिरफ्तार कर लिया था.
जबकि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304-बी (दहेज मृत्यु) के तहत मामला दर्ज किया गया था, अदालत ने देखा कि पीड़िता के वैवाहिक जीवन में सब सामान्य नहीं था और उसने बहुत उत्पीड़न और क्रूरता का सामना किया था. इस प्रकार, मामले में धारा 304-बी के तत्व गायब थे. आरोपी संदीप यादव और उसकी मां कलावती को आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 498-ए (पति या पति के रिश्तेदार द्वारा महिला के साथ क्रूरता करना) के तहत दोषी ठहराया गया था. हालांकि, उसके देवर, ननद और ससुर को बरी कर दिया गया था.
अदालत ने दोषियों को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है और धारा 306 के तहत अपराध के लिए प्रत्येक को 10,000 रुपये का जुर्माना और धारा 498-ए के तहत अपराध के लिए तीन साल के कठोर कारावास और प्रत्येक को 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
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