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Friday 04 Apr 2025 5:09 AM

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आदिशंकराचार्य की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित हुए विविध कार्यक्रम!



नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय प्रयागराज के ज्योतिष कर्मकाण्ड वास्तुशास्त्र एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ देव नारायण पाठक ने आदि शंकराचार्य के जयंती की पूर्व संध्या पर आदि शंकराचार्य’ की जन्म कथा पर चर्चा करते हुए बताया कि असाधारण प्रतिभा के धनी आद्य जगदगुरू शंकराचार्य का जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी के पावन दिन हुआ था।दक्षिण के कालाड़ी ग्राम में जन्में शंकर जी आगे चलकर ‘जगद्गुरु आदि शंकराचार्य’ के नाम से विख्यात हुए. इनके पिता शिवगुरु नामपुद्रि के यहाँ जब विवाह के कई वर्षों बाद भी कोई संतान नहीं हुई, तो इन्होंने अपनी पत्नी विशिष्टादेवी सहित संतान प्राप्ति की इच्छा को पूर्ण करने के लिए से दीर्घकाल तक भगवान शंकर की आराधना की इनकी श्रद्धा पूर्ण कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा -

शिवगुरु ने प्रभु शंकर से एक दीर्घायु सर्वज्ञ पुत्र की इच्छा व्यक्त की. तब भगवान शिव ने कहा कि ‘वत्स, दीर्घायु पुत्र सर्वज्ञ नहीं होगा और सर्वज्ञ पुत्र दीर्घायु नहीं होगा। अत: यह दोनों बातें संभव नहीं हैं ।तब शिवगुरु ने सर्वज्ञ पुत्र की प्राप्ति की प्रार्थना की और भगवान शंकर ने उन्हें सर्वज्ञ पुत्र की प्राप्ति का वरदान दिया तथा कहा कि मैं स्वयं पुत्र रूप में तुम्हारे यहाँ जन्म लूंगा।

इस प्रकार उस ब्राह्मण दंपती को संतान रूप में पुत्र रत्न की प्राप्त हुई और जब बालक का जन्म हुआ तो उसका नाम शंकर रखा गया शंकराचार्य ने शैशव में ही संकेत दे दिया कि वे सामान्य बालक नहीं है। सात वर्ष की अवस्था में उन्होंने वेदों का पूर्ण अध्ययन कर लिया था, बारहवें वर्ष में सर्वशास्त्र पारंगत हो गए और सोलहवें वर्ष में ब्रह्मसूत्र- भाष्य कि रचना की उन्होंने शताधिक ग्रंथों की रचना शिष्यों को पढ़ाते हुए कर दी अपने इन्हीं महान कार्यों के कारण वह आदि गुरू शंकराचार्य के नाम से प्रसिद्ध हुए।इस अवसर पर जमुनीपुर परिसर में में शोभायात्रा निकली  गयी ,जिसमें बडी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा यात्रा करते समय रास्ते भर गुरु वन्दना और भजन-कीर्तनों का दौर चलता रहा। इस अवसर पर  वैदिक विद्वानों द्वारा वेदों का सस्वर गान प्रस्तुत किया गया और समारोह में शंकराचार्य विरचित गुरु अष्टक का पाठ भी किया गया। इस अवसर पर डॉ.प्रभात कुमार, डॉ.वी.के.मौर्य, डॉ.अरविन्द, डॉ.ममता मिश्रा,  डॉ.संजय कुमार भारती, अनामिका सिंह,काजल पाण्डेय, तथा ज्योतिष, कर्मकाण्ड, वास्तुशास्त्र डिप्लोमा तथा संस्कृत विभाग के सैंकड़ों छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।



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