क्या सरकार संसद में वक्फ बिल पारित करवा पाएगी? जानिए लोकसभा-राज्यसभा का नंबर गेम!
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- Updated: 2 April, 2025 01:27
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केंद्र सरकार बुधवार (2 अप्रैल 2025) को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक लाएगी। संसदीय सलाहकार समिति की बैठक के दौरान सरकार की ओर से विपक्षी दलों को यह जानकारी दी गई है। इस पर चर्चा के लिए कम से कम 8 घंटे का समय तय किया गया है।
सरकार की मंशा साफ है कि इस बिल को जल्द से जल्द लोकसभा में लाया जाए और पारित करवाया जाए। सरकार को उम्मीद है कि एनडीए में शामिल उसके सभी सहयोगी इस बिल पर उसका साथ देंगे, तो ऐसे में जब यह बिल लोकसभा में पारित हो जाएगा तो सरकार के लिए यह राह कितनी आसान होगी। इसे समझने के लिए सबसे पहले आपको बताते हैं कि लोकसभा में एनडीए की मौजूदा स्थिति क्या है और बीजेपी क्यों उम्मीद कर रही है कि यह बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हो सकता है। लोकसभा का नंबर गेम
लोकसभा में कुल 543 सांसद हैं और बहुमत के लिए 272 सांसदों का समर्थन जरूरी है। एनडीए के पास अभी 293 सांसद हैं, जिसमें से बीजेपी के पास अपने 240 सांसद हैं। इसके साथ ही जेडीयू के पास 12 सांसद, टीडीपी के पास 16 सांसद, एलजेपी (रामविलास) के पास 5 सांसद, शिवसेना (शिंदे गुट) के पास 7 सांसद और जीतन राम मांझी की पार्टी हम समेत अन्य छोटे सहयोगी दलों के सदस्य हैं। फिलहाल सरकार के पास बिल पास कराने के लिए जरूरी 272 की संख्या से 21 सांसद ज्यादा हैं। एनडीए के सभी दलों ने व्हिप जारी कर अपने सांसदों को लोकसभा में मौजूद रहने का निर्देश दिया है।
कितने वोट चाहिए? बीजेपी को राज्यसभा में!
राज्यसभा में अभी 234 सदस्य हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर की 4 सीटें खाली हैं। इस लिहाज से बहुमत के लिए 118 सांसदों की जरूरत है। फिलहाल बीजेपी के पास अपने 96 सांसद हैं और एनडीए में सहयोगी दलों की संख्या जोड़ने के बाद भी यह आंकड़ा 113 ही पहुंचता है. इन 113 में जेडीयू के 4, टीडीपी के 2 और अन्य छोटी पार्टियों के सांसद शामिल हैं, इसके अलावा 6 मनोनीत सदस्य भी हैं, जो आमतौर पर सरकार के पक्ष में वोट करते हैं. ऐसे में एनडीए की संख्या बहुमत के आंकड़े 118 को पार कर जाती है.
हालांकि, यह भी एक सच्चाई है कि बीजेपी सरकार अगर राज्यसभा में कोई बिल लेकर आई है, तो उसके पास बहुमत का आंकड़ा हो या न हो, लेकिन फिर भी कोई बिल राज्यसभा में अटका नहीं है और सरकार सभी बिलों को पास कराने में सफल रही है. ऐसे में बीजेपी सरकार को उम्मीद है कि सरकार संसद के दोनों सदनों में पूर्ण बहुमत से वक्फ संशोधन बिल पास करा लेगी.
कर रही हैं विरोध
वैसे तो इस बिल का विरोध करने की बात सभी विपक्षी दल कर रहे हैं, जिसमें कांग्रेस, सपा, टीएमसी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम शामिल हैं, लेकिन फिलहाल इनकी कुल संख्या 250 से भी कम है। सवाल यह भी है कि अगर बिल पर वोटिंग की जरूरत पड़ी तो क्या सभी विपक्षी सांसद खुलकर बिल का विरोध करेंगे, यानी विपक्ष एकजुट रहेगा?
लोकसभा से पास होने के बाद बिल गुरुवार (3 अप्रैल 2025) को राज्यसभा में लाया जाएगा। राज्यसभा में भी चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया गया है। हालांकि, लोकसभा के मुकाबले राज्यसभा में सरकार की स्थिति मजबूत नहीं दिख रही है।
केंद्र ने अपना रुख साफ किया किस मुद्दों पर
सूत्रों के मुताबिक, इस बिल में वक्फ को लेकर सभी शंकाओं को लेकर स्थिति साफ हो गई है। इसी प्रावधान के आधार पर सभी विपक्षी दल और मुस्लिम संगठन सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे थे। विपक्षी दल का आरोप है कि सरकार की मंशा हर दौर की जमीनों, दरगाहों और मस्जिदों पर कब्जा करने की है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा लाए गए बिल में साफ तौर पर कहा गया है कि कानून 2025 से पहले जो संपत्तियां वक्फ के अधीन हैं, वे भविष्य में भी वक्फ की संपत्ति ही रहेंगी, बशर्ते उन पर किसी तरह का कोई विवाद न हो।
राज्य सरकार के अधिकारी को जोड़ा जाएगा वक्फ बोर्ड में
सूत्रों के मुताबिक इस बिल में कहा गया है कि जो भी व्यक्ति वक्फ को जमीन दान कर रहा है, उसे यह साबित करना होगा कि वह कम से कम 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहा है। इस प्रावधान का मकसद धर्म परिवर्तन कर जमीन हड़पने के मामलों पर लगाम लगाना है।
इसके साथ ही सामने आ रही जानकारी के मुताबिक बिल में वक्फ काउंसिल/बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या एक तरह से बढ़ गई है, क्योंकि पदेन सदस्यों (मुस्लिम या गैर मुस्लिम) को गैर मुस्लिम सदस्यों की गिनती से बाहर रखा जाएगा। अब समिति में दो सदस्य हिंदू या इस्लाम के अलावा किसी भी धर्म से हो सकते हैं और एक राज्य सरकार का अधिकारी जोड़ा जाएगा।
जांच का अधिकार पहले कलेक्टर को दिया गया था
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए पुराने संशोधन विधेयक में जांच का अधिकार कलेक्टर को दिया गया था, लेकिन नए विधेयक के बारे में जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार अब राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी (कलेक्टर से वरिष्ठ) वक्फ संपत्ति की देखभाल और निगरानी करेगा। अब वक्फ न्यायाधिकरण में 2 की जगह 3 सदस्य होंगे और तीसरा सदस्य इस्लामिक होगा।
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