पचखरा गांव के दलितों की जमीन पर दबंगो ने किया अवैध कब्जा,अभी तक नहीं हुई कार्यवाही !
- Posted By: Admin
- उत्तर प्रदेश
- Updated: 29 December, 2023 11:49
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प्रयागराज। थाना घूरपुर के अंतर्गत पचखरा गांव के दलितों के पट्टे की जमीन पर गांव के दबंगो ने जबरन कब्जा कर लिए जाने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित दलितों ने जब इसका विरोध किया तो दबंगो ने न केवल जातीय आधार पर उत्पीड़न किया अपितु धमकी भी दी गई। उक्त आरोप पीड़ित दलित माधो राम, दयाराम, रामगरीब, रमेश तथा रन्नो देवी ने लिखित शिकायत
पुलिस उपायुक्त यमुनानगर और तहसील प्रशासन को देकर कब्जा वापस दिलाने तथा दबंगो के विरुद्ध कार्यवाही का अनुरोध किया है। पुलिस उपायुक्त ने संज्ञान लेते हुए न्याय का आश्वासन दिया है।
गौर तलब है कि पचखरा गांव के पीड़ित भूमि हीन दलितों को कृषि कार्य हेतु वर्ष 2002 में माधो राम पुत्र मंगाली के हक में आराजी संख्या-370 रकबा 0.1250 हे०, रन्नो देवी पत्नी माधो राम के हक में आराजी संख्या-206 रकबा 0.1140 हे०, दयाराम पुत्र शारदा प्रसाद के हक में आराजी संख्या-283 रकबा 0.1090 है०, रामगरीब पुत्र सुन्दर के हक में आराजी संख्या-178 रकबा 0.1140 है० तथा रमेश पुत्र प्यारे लाल के हक में आराजी संख्या-205 रकबा 0.1140 हे० भूमि का पट्टा प्रशासन द्वारा किया गया। जो वर्तमान में पट्टेदारों के नाम खतौनी में बतौर भूमिधरी दर्ज हैं।
पीड़ित दलितों का कहना है कि गांव के दबंग सामंतो ने प्रशासन द्वारा कृषि कार्य हेतु दी गई पट्टे की जमीन पर अवैध रूप से 7 जुलाई 2023 को जबरन कब्जा कर लिया गया। जब पीड़ित पक्ष के लोगो ने इसका विरोध किया तो जान से मार देने की धमकी दी गई तथा जातीय आधार पर गाली गलौज भी किया गया। पीड़ित पक्ष की कोई सुनवाई न होने पर बीते गुरुवार को पुलिस उपायुक्त यमुनानगर के समक्ष अनिश्चित कालीन आमरण अनशन पर बैठने की सूचना पर हड़कंप मच गया । पुलिस और तहसील प्रशासन ने पीड़ितों को न्याय का भरोसा दिया है कि एक सप्ताह में समस्या का निस्तारण कर पीड़ितों की जमीन पर से अवैध कब्जा हटा दिया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस उपायुक्त यमुनानगर एवं तहसील प्रशासन ने संज्ञान ले लिया है। आराजी संख्या 283 तथा 178 का निस्तारण कर दिया गया है जब कि आराजी संख्या 370, 205 तथा 206 पर से एक सप्ताह में अवैध कब्जा हटवा दिए जाने का आश्वासन पुलिस उपायुक्त यमुनानगर एवं तहसील प्रशासन द्वारा दिया गया है। देखना होगा कि पुलिस और तहसील प्रशासन पीड़ितों को दिया गया आश्वासन क्या एक सप्ताह में अमल में आयेगा या कोरा आश्वासन ही रहेगा।
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