अवसाद, डिप्रेशन कारण एवं रोकथाम!
अवसाद एक मानसिक रोग है, जिसमे व्यक्ति अकेलेपन, उदासी जैसे खुद के बनाए हुए विचारों के जंजाल में उलझता है, इसे हम मनोविकार कह सकते है, जिसका असर व्यक्ति के सोच, व्यवहार पर पड़ता है l अनिश्चयता की स्थिति, अत्याधिक नकारात्मक विचार जो अवसाद, डिप्रेशन, एनेक्सिटी, स्ट्रेस को जन्म दे रहा जो आगे चलकर आत्महत्या का रूप भी ले सकता है l
शुरुआत में अवसाद के लक्षण को पहचान पाना मुश्किल है ये सिर्फ दीर्घ विकारों के साथ समझ आता है की व्यक्ति इससे ग्रसित है l फिर भी अगर ध्यान दिया जाए तो हम कई तरीके से बता सकते है जैसे
1 - गुस्सा या घबराहट - गुस्सा करना एक स्वाभाविक अवस्था है, लेकिन व्यक्ति जब हर पल गुस्से की अवस्था में रहे या फिर पल पल में अपनी अवस्था को बदलता रहे तो यह डिप्रेशन का संकेत हो सकता है l
2 - उदासी - उदासी भी कोई समस्या नहीं है लेकिन तब तक जब इंसान उसको अपने अंतर्मन में जगह न दे कोई भी व्यक्ति अवसाद का शिकार तभी होता है जब उदासी को अपने अंतर्मन के साथ खिलवाड़ करने देता है l इसलिए उदास व्यक्ति अवसाद और तनाव में रहता है l
3 - अकेलापन, हमेशा खाली बैठे सोचते रहना, लगातार परिणाम में कमी, व्यवहार परिर्वतन, प्रतिस्पर्धा के कारण अपनी तुलना किसी से कर हीन भावना को बढ़ावा देने से भी व्यक्ति को अवसाद हो सकता है l
4 - नींद का न आना अथवा अधिक आना, भूख का न लगना भी अवसाद की तरफ संकेत हो सकते है l
5 - समाचार, मीडिया में लगातार नकारात्मक चीजों को देखते रहने से भी अवसाद, मनोविकृति बढ जाती है l
अवसाद से बचने के लिए चाहिए की जो चीज आपके नियंत्रण में है उसी में ध्यान केंद्रित किजिए, केवल वही काम करें जिसे कर सकते है l परिवार में बुजुर्गो, बच्चों के साथ हंसी मज़ाक करें, अपने अनुभवों को साझा करें, अपनी हॉबिस को पुरा करे जैसे ड्राइंग, रीडिंग, खाना बनाने, संगीत आदि में समय दे, अपने आपको व्यस्त रखे l
सोशल मीडिया को कम करें, नकारात्मक समाचारों को न देखें ना ही किसी के साथ साझा करें l रात में मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करने से नींद में व्यवधान उत्पन्न होता है इसलिए सोने से एक घंटे पहले मोबाइल छोड़ दें । अपनी दिनचर्या में सुबह घर पर ही रोज कम से कम एक घंटे योग, मेडिटेशन, व्यायाम अवश्य करें, पसंदीदा संगीत सुने प्रसन्न रहें l पौष्टिक आहार में दूध, दलिया, अंकुरित चने, शहद, आंवले, मिक्स दाल, सलाद को शामिल करें l
फिर भी किन्हीं कारणों से स्वास्थ्य मे परिवर्तन नहीं दिख रहा तो मनोचिकित्सक से परमार्श अवश्य लें।
हमेशा सकारात्मक सोच रखें, ये बुरा वक्त है गुजर जाएगा, हमारी इच्छाशक्ति से हम इससे विजय होकर निकलेंगे l
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