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Friday 04 Apr 2025 5:08 AM

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डिजिटल रेप कैसे होता है और इसमें आरोपी को कितनी सजा मिलती है?


हाल ही में उत्तर प्रदेश के नोएडा से डिजिटल रेप से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। इस मामले में पीड़िता स्कूल में पढ़ने वाली 4 साल की बच्ची है। आपको बता दें, यह मामला नोएडा के थाना 39 क्षेत्र का है। 4 साल की बच्ची इसी थाना क्षेत्र के सेक्टर 37 स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ती थी, जहां उसके साथ यह घटना घटी। बच्ची की मां का आरोप है कि स्कूल के बाथरूम में बच्ची के साथ डिजिटल रेप जैसा जघन्य अपराध हुआ है। नोएडा में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी नोएडा में डिजिटल रेप के मामले सामने आ चुके हैं और इसमें दोषियों को सजा भी मिली है। आइए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं। 2019 में भी आया था मामला इससे पहले 21 जनवरी 2019 को नोएडा में ऐसा ही मामला हुआ था। इस मामले में आरोपी अकबर अली था, जिसकी उम्र 65 साल थी। पुलिस के मुताबिक अली पश्चिम बंगाल का रहने वाला था और अपनी बेटी से मिलने नोएडा आया था. यहां उसने अपनी बेटी के घर के बगल में रहने वाली 3 साल की बच्ची को टॉफी देने के बहाने बुलाया और उसके साथ डिजिटली रेप किया. इस मामले में अकबर अली को भी सजा सुनाई गई थी.


क्या है डिजिटल रेप?

अगर आपको लगता है कि डिजिटल रेप का मतलब ऑनलाइन पोर्न देखना या ऑनलाइन अपराध करना है, तो आप गलत हैं. दरअसल, डिजिटल रेप का मतलब है जब आरोपी अपने हाथ या पैर की उंगलियों से पीड़िता का यौन शोषण करता है. यह कानून निर्भया कांड के बाद आया था. इस कानून को साल 2013 में मान्यता दी गई थी. इसके मुताबिक, हाथ की उंगली या अंगूठे से जबरन प्रवेश करना यौन अपराध माना जाता था और इसे धारा 375 और पॉक्सो एक्ट की श्रेणी में रखा गया था.


सजा क्या है ?

साल 2019 में सामने आए इस मामले में गौतमबुद्ध नगर की जिला अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. इसके अलावा उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. दरअसल, इस मामले में ज़्यादातर पीड़ित लड़कियां होती हैं, इसलिए आरोपियों पर POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है। POCSO एक्ट में अपराध की गंभीरता के आधार पर 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सज़ा का प्रावधान है। अगर पीड़िता की मौत हो जाती है, तो आरोपी को मौत की सज़ा भी हो सकती है।

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